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Bihar Flood: गंगा-कोसी समेत कई नदियां उफान पर, तटबंधों पर बढ़ा दबाव; भागलपुर में कटाव से दहशत

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में गंगा, कोसी और बूढ़ी गंडक समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा, भागलपुर के खरीक में तटबंध कटाव से कई वार्ड प्रभावित, प्रशासन अलर्ट।

भागलपुर, 26 अगस्त। बिहार में नदियों का बढ़ता जलस्तर एक बार फिर निचले इलाकों के लिए चिंता का कारण बन गया है। गंगा, कोसी और बूढ़ी गंडक समेत कई प्रमुख नदियों में पानी का दबाव बढ़ने के साथ तटबंधों पर भी खतरा मंडराने लगा है। सबसे गंभीर स्थिति भागलपुर के खरीक अंचल में सामने आई है, जहां काजीकौरेया-राघोपुर तटबंध पर लगातार कटाव होने से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।

राघोपुर पंचायत में तटबंध के क्षतिग्रस्त हिस्से से पानी फैलने के कारण पांच वार्ड प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं और कटाव को नियंत्रित करने की कोशिश लगातार जारी है।

तटबंध के 120 मीटर हिस्से पर खतरा

काजीकौरेया-राघोपुर तटबंध का करीब 120 मीटर हिस्सा संवेदनशील बना हुआ है। रविवार देर रात तटबंध का लगभग 30 मीटर हिस्सा कट गया था। इसके बाद मंगलवार सुबह एक और हिस्से में कटाव शुरू हुआ और देखते ही देखते करीब 20 मीटर हिस्सा प्रभावित हो गया।

लगातार कटाव ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। पानी के तेज बहाव के कारण तटबंध के नीचे की मिट्टी खिसकने की बात सामने आई है। यदि कटाव पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया तो आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी और तेजी से फैल सकता है।

बैकवाटर से बढ़ी मुश्किल

जल संसाधन विभाग, नवगछिया के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार के अनुसार रिंग बांध बनाए जाने के कारण पानी का दबाव बढ़ा, जिसके बाद कटाव तेजी से फैल गया। गंगा के बैकवाटर का लगातार दबाव तटबंध के नीचे की मिट्टी को प्रभावित कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार फिलहाल करीब 120 मीटर के हिस्से को संवेदनशील मानकर बचाव कार्य किया जा रहा है। मौके पर इंजीनियर और विभागीय कर्मी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

'हाथी पांव' से रोकने की कोशिश

कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से जियो बैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। बांस और तार के फ्रेम को तैयार कर उसमें जियो बैग भरकर नदी के कटाव वाले हिस्से में डाला जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसे 'हाथी पांव' तकनीक के नाम से बताया जा रहा है।

जियो बैग को घटनास्थल तक पहुंचाने के लिए करीब 100 ट्रैक्टर लगाए गए हैं। विभाग की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा सामग्री जल्द से जल्द कटाव वाले हिस्से तक पहुंचाई जाए और तटबंध को अतिरिक्त मजबूती दी जा सके।

संकरी सड़क बनी बड़ी बाधा

बचाव कार्य के बीच सबसे बड़ी परेशानी तटबंध तक पहुंचने वाली संकरी सड़क है। रास्ता इतना संकरा है कि एक समय में लगभग एक ही ट्रैक्टर के निकलने की जगह मिलती है। इसके कारण जियो बैग और दूसरी सामग्री को मौके तक पहुंचाने की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

दूसरी तरफ नदी की तेज धार बचाव दल के लिए चुनौती बनी हुई है। पानी के तेज करंट के कारण नावों को भी एक जगह स्थिर रखने में परेशानी हो रही है। यही वजह है कि मंगलवार शाम तक रिंग बांध का निर्माण पूरा नहीं हो सका।

पांच वार्डों में पहुंचा पानी

रविवार देर रात तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद राघोपुर पंचायत के पांच वार्डों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था। इसके बाद सोमवार सुबह से जिला प्रशासन और अभियंताओं की टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्से को बचाने के लिए काम शुरू किया।

प्रशासन की ओर से रिंग बांध तैयार करने की कोशिश की गई, लेकिन मंगलवार को एक नए हिस्से में कटाव शुरू होने से चुनौती और बढ़ गई। अब विभाग को एक साथ तटबंध के क्षतिग्रस्त हिस्से को बचाने और पानी के दबाव को नियंत्रित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

लगातार बढ़ते पानी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कई परिवारों को घर में रखे जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि तटबंध का और हिस्सा कटता है तो बाढ़ का पानी आबादी वाले क्षेत्रों में तेजी से फैल सकता है।

प्रशासन की ओर से लोगों से सतर्क रहने और स्थिति पर नजर रखने की अपील की जा रही है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है।

रेलवे ने भी बढ़ाई निगरानी

नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इसे देखते हुए रेलवे ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ के दौरान पानी के कारण ट्रैक के आसपास मिट्टी कटने और पटरियों के नीचे की जमीन प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे इलाकों में 24 घंटे पेट्रोलिंग की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जरूरत पड़ने पर तत्काल इस्तेमाल के लिए स्टोन डस्ट और बालू से भरी बोरियों की व्यवस्था भी रखी गई है। जिन स्थानों पर पानी के पहुंचने की आशंका है, वहां रेलकर्मियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

कई जिलों में नदियों पर नजर

भागलपुर के अलावा गंगा के किनारे बसे बेगूसराय, मुंगेर, खगड़िया और कटिहार जैसे जिलों में भी प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। निचले इलाकों में जलभराव और कटाव की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।

गंगा के साथ-साथ कोसी और बूढ़ी गंडक में पानी का दबाव बढ़ने से उन क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ी है, जहां पहले से बाढ़ का असर रहा है। जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी निचले इलाकों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।

आगे के दिनों पर टिकी नजर

फिलहाल भागलपुर में तटबंध बचाने का अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता कटाव को आगे बढ़ने से रोकना और आबादी वाले क्षेत्रों में पानी के फैलाव को नियंत्रित करना है।

बाढ़ की स्थिति आगे कितनी गंभीर होगी, यह काफी हद तक नदियों के जलस्तर और अगले कुछ दिनों के बहाव पर निर्भर करेगा। ऐसे में प्रशासन, जल संसाधन विभाग और रेलवे सभी स्तरों पर निगरानी बढ़ा रहे हैं।

बिहार में नदियों का बढ़ता जलस्तर यह संकेत दे रहा है कि बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। तटबंधों की सुरक्षा, समय पर राहत-बचाव और संवेदनशील इलाकों के लोगों को सुरक्षित निकालना आने वाले दिनों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।

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तटबंधों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती

बिहार में हर साल बाढ़ का संकट सामने आता है, लेकिन इस बार कई जगह तटबंधों पर हो रहा कटाव प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बन रहा है। केवल तटबंध टूटने के बाद बचाव कार्य शुरू करना पर्याप्त नहीं है। संवेदनशील हिस्सों की पहले से पहचान और लगातार निगरानी बेहद जरूरी है।

भागलपुर के खरीक में जिस तरह एक हिस्से के बाद दूसरे हिस्से में कटाव शुरू हुआ, उससे साफ है कि तेज बहाव के बीच तटबंधों पर दबाव कितना ज्यादा है। जियो बैग और दूसरी तकनीकों से तत्काल राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए तटबंध की संरचना और नदी के बहाव का वैज्ञानिक अध्ययन भी जरूरी है।

इसके साथ ही ग्रामीणों को समय रहते सूचना देना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। बाढ़ के समय कुछ घंटे भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए राहत सामग्री, नाव, चिकित्सा टीम और सुरक्षित ठिकानों की तैयारी पहले से रहनी चाहिए।

फिलहाल भागलपुर की स्थिति पर सबसे ज्यादा नजर है। यदि कटाव नियंत्रित हो जाता है तो बड़ा संकट टल सकता है, लेकिन नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी स्थिति को फिर गंभीर बना सकती है।

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